दिल्ली: दिल्ली में जहां गर्मियों में दिल्ली का तापमान और सर्दियों में स्मॉग लोगों की सेहत पर गंभीर असर डालते हैं. वहीं इन दिनों दिल्ली में बढ़ते पंछियों की आबादी भी अब दिल्ली वालों की सेहत खराब कर रही है. दरअसल, हाल ही में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून (एनजीटी) ने दिल्ली में बढ़ते पंछियों से फैल रही गंदगियों और बीमारियों को तब गंभीरता से लिया जब एक 13 वर्षीय छात्र अरमान पालीवाल ने अपनी याचिका में कबूतरों से फैल रही अस्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का जिक्र किया. इसके बाद एनजीटी ने दिल्ली गवर्नमेंट से भी इस पर जवाब मांगा है. वहीं एक्सपर्ट का इस पर क्या कुछ कहना है आइए जानते हैं…

फैल सकती हैं कई गंभीर बीमारियां
दिल्ली के चैरिटेबल बर्ड्स हॉस्पिटल के डॉ हरअवतार सिंह का कहना था कि इस वक्त दिल्ली में कबूतरों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ रही है. एक उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पहले एक दिन में 70 से 80 पक्षियों की बीमारियों के कैस आते थे और उसमें से 10-15 ही कबूतर होते थे. वहीं अब अगर प्रतिदिन 80 कैस आते हैं, तो उसमें से 40 से 50 कबूतर बीमार होते हैं, जिससे साफ दिखता है कि दिल्ली में कबूतरों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसके कारण कई तरह की बीमारियां फैल सकती हैं. जो कि कुछ मनुष्यों के लिए खतरनाक साबित भी हो सकता है.
उन्होंने कहा की कबूतरों की बीट (मल) से हिस्टोप्लाजमोसिस, क्रिप्टोकॉकोसिस, और सिटाकोसिस जैसी बीमारियों का खतरा होता है. इसके अलावा, कबूतर कुछ जीवाणुओं और वायरस को भी फैला सकते हैं, जिसमें साल्मोनेला. ई.कोलाई और वेस्ट नाइल वायरस शामिल है, जिससे दिल्ली में लोगों में एलर्जी, दिमाग और फेफड़ों के संक्रमण और अन्य सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा.